क्या केरल में निपाह मरीजों की मौत की वजह बनी एक्सपायर्ड Remdesivir? स्वास्थ्य विभाग ने गठित किया मेडिकल बोर्ड

केरल में निपाह वायरस संक्रमण के इलाज को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। क्या पिछले तीन वर्षों (2023 से 2025) के दौरान निपाह मरीजों को एक्सपायर्ड (अवधि समाप्त) रेमडेसिविर एंटीवायरल इंजेक्शन दिए गए थे, जिससे उनकी जान गई। इस सवाल को लेकर राज्य सरकार ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।

विधानसभा में स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन के इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य महकमे और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। कांग्रेस विधायक मैथ्यू कुझालनादन के सवाल का जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने विधानसभा को बताया कि कोझिकोड मेडिकल कॉलेज अस्पताल के वितरण रिकॉर्ड से गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं।

अंतिम आधिकारिक खरीद: केरल मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (KMSCL) ने आखिरी बार 3 जून, 2021 को 3,000 रेमडेसिविर शीशियां (vials) खरीदी थीं, जिनकी कुल लागत ₹42 लाख थी।

दवा की समाप्ति तिथि (Expiry Date): इस पूरे लॉट की एक्सपायरी डेट 30 मई, 2023 थी। मई 2023 के बाद सरकारी स्तर पर कोई नई घरेलू खरीद दर्ज नहीं है, फिर भी अस्पतालों में इसका इस्तेमाल जारी रहा। इससे यह सवाल उठता है कि क्या लोगो को एक्सपायर्ड इंजेक्शन दिया गया है?

वित्तीय वर्षइस्तेमाल की गई शीशियां (Vials)निपाह के कुल मामलेमौतों की संख्या
2023–2410262
2024–253422
2025–261032
2026–2750 (बहरीन से आयातित)10 (मरीज स्वस्थ)

ध्यान देने योग्य तथ्य: वित्तीय वर्ष 2026–27 में इस्तेमाल की गई 50 शीशियां 12 जून, 2026 को बहरीन से मंगवाई गई थीं, और इस वर्ष निपाह से संक्रमित एकमात्र मरीज पूरी तरह ठीक हो गया।

विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड का गठन: एक स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड यह जांचेगा कि क्या एक्सपायर्ड एंटीवायरल दवा दिए जाने से मरीजों की स्थिति बिगड़ी या मौत हुई।चिकित्सा शिक्षा निदेशालय (DME) और स्वास्थ्य सेवा निदेशालय (DHS) को निर्देश दिया गया है कि वे पिछले वर्षों में रेमडेसिविर पाने वाले प्रत्येक मरीज का पूरा मेडिकल रिकॉर्ड और हिस्ट्री तुरंत एकत्र करें।

रेमडेसिविर एक एंटीवायरल दवा है, जिसे भारत में कोविड-19 महामारी के दौरान उपचार के लिए निर्धारित किया गया था। यह एक पेटेंट दवा है, जिसे अमेरिका की गिलियड लाइफ साइंसेज द्वारा भारतीय दवा कंपनियों को दिए गए स्वैच्छिक लाइसेंस (voluntary licenses) के तहत भारत में निर्मित किया जाता है।